नागौर न्यूज: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया है कि रेवंतराम डांगा के पत्र लीक होने में गजेंद्र सिंह खींवसर की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पत्र किसी अधिकारी द्वारा लीक किया गया था।
कुछ दिनों पहले रेवंतराम डांगा का एक पत्र वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने खींवसर के अधिकारियों की विचारधारा को आरएलपी पार्टी से जुड़ा बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये अधिकारी हनुमान बेनीवाल के इशारे पर काम कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने अपनी ही सरकार पर आरोप लगाया था कि उनके द्वारा सिफारिश किए गए अधिकारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण नहीं किए गए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि आगामी चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
इसके बाद, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि पत्र वायरल करने में भाजपा के ही किसी सदस्य की भूमिका रही है। इसके बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का नाम इस मामले से जोड़ा गया।
मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर
इस पर गजेंद्र सिंह खींवसर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ज्योति मिर्धा को पहले सबूत देना चाहिए। उन्होंने कहा कि “लोग आरोप लगाते हैं, लेकिन उन्हें साबित नहीं कर सकते। इससे ज्यादा ओछी हरकत और कुछ नहीं हो सकती। मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। मैं मंत्री पद पर रहकर बड़े काम कर रहा हूं, मेरे पास ऐसी छोटी हरकतों के लिए समय नहीं है।”
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़
आज मदन राठौड़ ने इस पूरे मामले पर कहा कि विधायक रेवंतराम डांगा का पत्र वायरल करने में एक अधिकारी की भूमिका सामने आई है। उन्होंने कहा कि “हमने इसकी जांच कर ली थी, उस पर नोटिंग भी थी और कार्रवाई भी हो चुकी है। इसलिए किसी मंत्री पर आरोप लगाने का कोई मतलब नहीं है। गजेंद्र सिंह ने कोई पत्र वायरल नहीं किया है।”
जनप्रतिनिधियों पर हावी होती ब्यूरोक्रेसी
राजस्थान में हाल ही में देखा गया है कि जहां सत्ता और विधायक किसी अन्य पार्टी के हैं वहां उन्हें काम करने से रोका जा रहा है। जैसे सीकर में कांग्रेस विधायक वीरेंद्र सिंह को दरकिनार कर आईजी अजय पाल लांबा ने हारे हुए भाजपा प्रत्याशी गजानंद कुमावत से थाने का उद्घाटन करवाया। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर आईजी अजयपाल लांबा की आलोचना भी हुई जहां उन्हें भाजपा की सोच वाला अधिकारी बताया गया जिसने विधायक से कैंची छीनकर हारे हुए प्रत्याशी से फीता कटवाने को मजबूर किया।
वहीं, खींवसर में भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा खुद यह शिकायत कर चुके हैं कि वे अपने ही क्षेत्र में अधिकारियों पर पकड़ नहीं बना पा रहे हैं। इससे साफ होता है कि या तो ब्यूरोक्रेसी जनप्रतिनिधियों पर हावी हो रही है या फिर राजनीतिक दल आपसी खींचतान में ही उलझे हुए हैं जिससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका कमजोर हो रही है।
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